किसान किसी के बहकावे में ना आयें, तर्क के आधार पर सोचे : प्रधानमंत्री

नया कृषि कानून छोटे किसानों के लिए वरदान: नरेंद्र मोदी

  • किसानों के हर मसले पर सरकार हर समय बात करने को तैयार : प्रधानमंत्री
  • राजनीतिक कारणों से ममता सरकार केंद्र की योजनाओं को लागू नहीं कर रही : पीएम

लखनऊ : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर आयोजित कृषक भाइयों से संवाद कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई राज्यों के किसानों से कृषि कानूनों के मसले पर बात की। प्रधानमंत्री ने नये कृषि क़ानून को दस करोड़ छोटे किसानों के लिए वरदान बताया इसके साथ प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान निधि योजना की नई किस्त जारी करते हुए पीएम मोदी ने 9 करोड़ किसानों के खाते में 18 हजार करोड़ रुपये डाले। इसके बाद प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी ने किसानों के मसले को लेकर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को आड़े हाथों लिया।

विपक्ष बंगाल सरकार के रवैये पर चुप क्यों : प्रधानमंत्री

पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राजनीतिक कारणों से केंद्र की पीएम किसान सम्मान निधि योजना नहीं लागू कर रही हैं। ममता राज्य के 70 लाख से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाने से रोक रही हैं। इसके बाद भी किसानों के हितैषी बनने वाले राजनीतिक दल खामोश हैं? इस मामले में विपक्षी दल चुप क्यों हैं?  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में विपक्षी दलों की खामोशी को स्वार्थी राजनीति का उदहारण बताया। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान योजना के तहत हर साल 6000 रुपये प्रदान किए जा रहे हैं लेकिन पश्चिम बंगाल की सरकार इस योजना को राज्य में लागू नहीं कर रही है।

प्रधानमंत्री ने आश्चर्य व्यक्त किया कि नए कृषि बिलों के खिलाफ आंदोलन हुए, लेकिन पश्चिम बंगाल में पीएम-किसान योजना को लागू नहीं करने के फैसले के खिलाफ कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल के लगभग 70 लाख किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र द्वारा वित्त पोषित है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि इस योजना का लाभ लेने के लिए पश्चिम बंगाल के 23 लाख से अधिक किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, लेकिन राज्य सरकार ने इतने लंबे समय तक सत्यापन प्रक्रिया को रोक दिया है।

प्रधानमंत्री का सवाल है कि पीएम-किसान सम्मान योजना का पैसा किसानों को मिले, इसके लिए कोई विरोध क्यों नहीं हुआ। यदि आप ममता के 15 साल पुराने भाषण को सुनते हैं, तो आपको पता चलेगा कि इस विचारधारा ने बंगाल को कितना बर्बाद कर दिया है। मोदी ने कहा कि सभी जानते हैं कि दशकों से वहां शासन करने वालों की राजनीतिक विचारधारा से राज्य कैसे बर्बाद हो गया है। जनता स्वार्थी राजनीति करने वालों को बहुत करीब से देख रही है। पश्चिम बंगाल में किसानों के लाभ पर बात नहीं करने वाली पार्टियां यहां दिल्ली के नागरिकों को किसानों के नाम पर परेशान करने में लगी हुई हैं और देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर रही हैं।

ममता सरकार पर यह हमला करने के बाद प्रधानमंत्री ने किसानों के आन्दोलन को हवा देने वाले विपक्षी दलों की तरफ रुख किया और कहा कि जिन राजनीतिक दलों को देश की जनता नकार चुकी है, वो आज कुछ किसानों को गुमराह करने में लगे हुए हैं। कुछ लोग किसानों और सरकार की चर्चा नहीं होने दे रहे हैं। राजनीतिक दल सिर्फ चर्चा में आने के लिए इस तरह के इवेंट कर रहे हैं। जबकि की हकीकत यह है कि हाल ही में राजस्थान, जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में पंचायत चुनाव में किसानों ने आंदोलन चलाने वाले दलों को नकारा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग आज आंदोलन चला रहे हैं वही उस सरकार के साथ थे, जिसने स्वामीनाथन रिपोर्ट को दबाकर रखा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने गांव के किसान के काम को आसान करने की कोशिश की है। जो आज किसानों के लिए आंसू बहा रहे हैं, उन्होंने सत्ता में रहते हुए क्या किया हर किसी को पता है।

किसानों के आंदोलन को लेकर प्रधानमंत्री बोले कि आंदोलन कर रहे किसानों की मांगे लगातार बदल रही हैं। आंदोलन की शुरुआत में मांग थी कि एमएसपी की गारंटी होनी चाहिए। अब ये आंदोलन भटक गया है, ये लोग कुछ लोगों के पोस्टर लगाकर जेल में बंद लोगों की रिहाई की मांग कर रहे हैं, अब कह रहे हैं टोल को खाली कर दो। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब किसान आंदोलन के नाम पर कई मुद्दों को उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हर मुददे पर हर समय बात करने को तैयार है। बात मुददों के आधार पर होगी। प्रधानमंत्री ने किसानों से अपील की है कि वह किसी के बहकावे में ना आये। तर्क के आधार पर सोंचे। सरकार के लाये कृषि क़ानून किसानों के हित करने वाले हैं। यह दावा करते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि कानूनों के बारे में विस्तार से बताया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, पहले कृषि कानून तोड़ने पर किसानों को पेनाल्टी लगती थी, लेकिन नए कानून में सरकार ने ऐसी पेनाल्टी को खत्म कर दिया है। अब खरीदार को किसानों को रसीद भी देनी होगी और तीन दिन के भीतर फसल का पैसा भी देना होगा। कई अन्य सुधारों का जिक्र भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों से संवाद करते हुए किया।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किसानों के साथ हुआ यह कार्यक्रम करीब दो घंटे चला। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा विकास भवन के परिसर में बड़ी संख्या में मौजूद किसानों और नवजवानों ने इस कार्यक्रम को देखा। मोहनलाल गंज के सांसद कौशल किशोर और प्रदेश सरकार के कई बड़े अधिकारी भी वहां मौजूद थे।

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